लोकायुक्त की भूमिका

लोकायुक्त का कार्यक्षेत्र एवं शक्तियां

 

भारतीय जनतांत्रिक प्रणाली को मजबूत एवं पारदर्शी बनाने के लिए समय- समय पर हमारे प्रशासन एवं सरकारों ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये है। इन्ही प्रयासों की कडी को और मजबूत करते हुए हरियाणा सरकार ने अपने एक अभूतपूर्व फैसले में राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति की है, जो न कवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लागायेगा बल्कि लोकसेवकों  की स्वेच्छाचारिता पर भी लगाम कसेगा।

“दि हरियाणा लोकायुक्त अधिनियम, 2002” राज्य में 27 जनवरी, 2003 को लागू हुआ और जस्टिस श्री प्रीतमपाल (पूर्व जज पंजाब एवम् हरियाणा हाई कोर्ट) 18 जनवरी, 2011 को हरियाणा के नये लोकायुक्त नियुक्त किये गये है ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की जो मुहिम सरकार ने शुरू की है उसे और तेजी प्रदान की जा सके।

1          लोकायुक्त के रूप में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति

लोकायुक्त से अभिप्राय है, धारा -3 के अधीन “दि हरियाणा लोकायुक्त अधिनियम 2002” के अन्तर्गत प्रावधान है कि ऐसे लोकसेवक जो स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को अनावश्यक या लाभ पहुंचाने या पक्षपात करने के लिये अथवा किसी व्यक्ति को अनावश्यक कष्ट या क्षति पहुचाने के लिये इस रूप में अपनी हैसियत का जानबूझ कर या साभिप्राय दुरूपयोग किया, ऐसे लोकसेवक के रूप में अपनी हैसियत में भ्रष्टाचार का दोषी है, ईमानदारी में कमी है या अपनी आय के स्त्रोतों से असंगत आर्थिक साधन या सम्पति उसके कब्जे में है तथा ऐसे आर्थिक साधन या सम्पति लोकसेवक द्वारा व्यक्तिगत रूप में या उसके परिवार के किसी अन्य सदस्य द्वारा धारण की गई है, ऐसे व्यक्ति इस दायरे में आते है।

2          लोकसेवक में शामिल है, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 21 में परिभाषित:

क)    कोई व्यक्ति जिसमें वर्तमान एवं पूर्व मुख्यमंत्री, अन्य मंत्री, राज्य विधान मंडल के सदस्य, विधान सभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष।

ख)    इसी प्रकार राज्य सरकार द्वारा निगमित, पंजीकृत/गठित किसी कानूनी या गैर कानूनी निकाय अध्यक्ष, उपाध्यक्ष/सदस्य।

ग)    हरियाणा नगरपलिका अधिनियम, 1973 द्वारा या उसके अधीन गठित किसी नगरपालिका समिति या परिषद् का कोई प्रधान / उप प्रधान।

घ)    हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 द्वारा या उसके अधीन गठित या गठित की गई निगम का कोई महापौर, वरिष्ठ या उप-महापौर।

ड)    हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 द्वारा या उसके अधीन गठित किसी जिला परिषद् का कोई प्रधान, उप प्रधान तथा किसी पंचायत समिति को कोई अध्यक्ष, उपाध्यक्ष।

च)    सरकारी समितियों से सम्बन्धित विधि के अधीन निगमित या पंजीकृत किसी समिति का प्रधान , उप प्रधान व प्रबन्ध निदेशक।

छ)    किसी विश्वविध्यालय का कोई कुलपति या कोई प्रति-कुलपति या कुल सचिव।

3          इसी प्रकार ‘शिकायत’ से अभिप्राय है कि कोई शिकायत, जिसमें किसी लोकसेवक जिनमें उच्चाधिकारी एवं समस्त कर्मचारी भी शामिल है, द्वारा किया गया कोई अभिकथन या शिकायत का कृत्य अधिरोपित है। ‘शिकायत’ का तात्पर्य है किसी व्यक्ति द्वारा दावा कि अधिकार जिसका वह हकदार है, उसे इन्कार किया जाता है या किसी लोकसेवक के कार्य की भूलचूक या किसी कृत्य द्वारा अयुक्तियुक्त विलम्बित किया गया है या कार्य जिसकी शिकायत की गई है, कुप्रशासन की केटैगरी/ श्रेणी में आता है।

4          कुप्रशासन से अभिप्राय है, कोई कार्य जो अन्यायपूर्ण, अनीतिपूर्ण, अयुक्तियुक्त, दमनपूर्ण, अनुचित, पक्षपातपूर्ण या विधि द्वारा समर्पित न हो।

5          भ्रष्टाचार’  में भारतीय दंड सहिता, 1860 के अधीन या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 अथवा भ्रष्टाचार निवारण के लिये तत्समय लागू किसी विधि के अधीन दण्डनीय कोई कृत्य शामिल है।

6          इस अधिनियम के अधीन किसी जांच पडताल, छानबीन, लोकायुक्त या उसके अमले के सदस्यों द्वारा प्राप्त की गई कोई सूचना तथा किसी भी सूचना का कोई साक्ष्य गोपनीय समझा जायेगा।

7          इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कोई भी व्यक्ति जो जानबूझ कर या विद्वेशपूवर्क इस अधिनियम के अधीन कोई झुठी शिकायत करता है तो दोश सिद्धी पर शिकायतकर्ता को कठोर कारावास (जो 3 वर्ष तक हो सकता है) या जुर्माने से (जो 10 हज़ार रुपये तक हो सकता है) या दोनों रूप में दंडित किया जायेगा।

भ्रष्टाचार फैलाने में समाज का हर वर्ग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहभागी है। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक सभी ने इसे अपनी स्वार्थपूर्ति हेतु पोषित किया हे जोकि कडवा सच है। लोकायुक्त जैसी बेहतर महत्वपूर्ण व्यवस्था होने के साथ-साथ समाज के सभी वर्गो से संवाद, विचार एवं परिचर्चा के आधार पर स्थायी नैतिक मूल्यों के प्रति पुनर्विश्वास जागृत करना होगा। राजनैतिक इच्छा-शक्ति को जनमत से तैयार करना होगा। जब आम व्यक्ति प्रशासनिक कुरीतियों को दूर करने के लिये सकंल्प लेगा और अपना रचनात्मक सहयोग देगा तभी से संस्थाएं मजबूत होंगी। आप भी देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाये और भ्रष्टाचार से मुक्ति पाएं।